Kitni Khoobsurat ho Tum - Poem | ख़ूबसूरती पर कविता

Kitni Khoobsurat ho Tum - Poem  | ख़ूबसूरती पर कविता

Khubsoorati par Kavita

*** Kitni Khoobsurat ho Tum - Poem ***


Tumhari khoobsurati ki din raat tareef karta hun mai....
tumhaari tasveer lekar yun hi hamesha dekha karta hun mai..
kya karu mai..itni khoobsurat jo ho tum...
jannat se aayi koi pari ho tum...!!!

Ttumhari ye nashili aankhen...aur unme wo gehre kaajal..
unhe aur bhi khoobsurat banaati hai..
unme aur bhi nasha jagaati hai..!!

tumhari ye pyaare honth...aur unme wo gulaabi rang....
choone ko mann karta hai..
unse baaten karne ko dil karta hai..

tumhaari ye ghane ghane zulfe...aur unme wo resham sa rang...
unme kho jaane ko dil karta hai....usme simat jaane ko dil karta hai..!!!

itni khoobsurat ho tum....auro se bilkul alag ho tum....aankhon ki jannat ho tum...
jannat se aayi koi pari ho tum.. 


___________________________________________________________________________

*** ख़ूबसूरती पर कविता ***

तुम्हारी खूबसूरती की दिन रात तारीफ करता हूँ में....
तुम्हारी तस्वीर लेकर यूँ ही हमेशा देखा करता हूँ में..
क्या करू में..इतनी खूबसूरत जो हो तुम...
जन्नत से आई कोई परी हो तुम...!!!

तुम्हारी ये नशीली आँखें...और उनमे वो गहरे काजल..
उन्हे और भी खूबसूरत बनाती है..
उनमे और भी नशा जगाती है..!!

तुम्हारी ये प्यारे होंठ...और उनमे वो गुलाबी रंग....
छूने को मन करता है..
उनसे बातें करने को दिल करता है..

तुम्हारी ये घने घने ज़ूलफे...और उनमे वो रेशम सा रंग...
उनमे खो जाने को दिल करता है....उसमे सिमट जाने को दिल करता है..!!!

इतनी खूबसूरत हो तुम....औरो से बिल्कुल अलग हो तुम....आँखों की जन्नत हो तुम...
जन्नत से आई कोई पारी हो तुम.. 

____________________________________

Page ::   1  2  3  4  5  6  7  8  9  10  11  12
____________________________________